Saturday, November 14, 2015

काश आप होते ... पापा




"काश उन बाहों का घेरा आज भी होता,
काश उन हाथों का स्पर्श आज भी होता,
जिन बाँहों में आते ही हर चेहरे पे आती किलकारी,
जिसकी मुस्कान लगती हर बचपन को प्यारी,
काश उन बाहों का घेरा आज भी होता |

जैसे हमें ऊँगली पकड़ के चलना सिखाया,
जैसे हमारे हर नखरे और नाज़ों को उठाया,
कभी प्यार से तो कभी गुस्से से समझाया,
फिर बड़े लाड़ से गले से लगाया,
काश उन बाहों का घेरा आज भी होता |

पापा... काश आप होते,
काश आपकी बाहों का घेरा होता,
आपका लाड़ होता, प्यार होता,
सिर्फ उसके लिए ही नहीं ..
मेरे लिए भी ...
काश आप होते.. आपका प्यार होता .. आपका साथ होता"